आजकल देखता नही कोई मन, सब देखते हैं बस धन! आजकल देखता नही कोई मन, सब देखते हैं बस धन!
सामने खड़ी देखता हूँ, छू सकता नहीं तुझे मैं, दिल से तड़पता हूँ, तेरे हुस्न की मदहोशी म सामने खड़ी देखता हूँ, छू सकता नहीं तुझे मैं, दिल से तड़पता हूँ, तेरे हुस्न की...
दुनिया चाहे पत्थर हो जाये कभी खुद को पत्थर बनाना नहीं। दुनिया चाहे पत्थर हो जाये कभी खुद को पत्थर बनाना नहीं।
दिन भर चलाएँ शब्दों के बाण, करे ना किसी का लिहाज दिन भर चलाएँ शब्दों के बाण, करे ना किसी का लिहाज
अगर प्यार इसे कहते हैं तो, “इमोशनल अत्याचार “की परिभाषा क्या है। अगर प्यार इसे कहते हैं तो, “इमोशनल अत्याचार “की परिभाषा क्या है।
गाँव के बरगद की छाँव अच्छी है, क्या करोगे लेकर मकान शहर में। गाँव के बरगद की छाँव अच्छी है, क्या करोगे लेकर मकान शहर में।